नई दिल्ली: गुजरात के जामनगर स्थित ग्रीन्स ज़ूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (GZRRC), जिसे ‘वनतारा’ के नाम से जाना जाता है, पर एक अंतरराष्ट्रीय खोजी रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जर्मन दैनिक अखबार ज़ूदॉयचे त्सायटुंग (Süddeutsche Zeitung) और वेनेजुएला के एक मीडिया आउटलेट की संयुक्त रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वनतारा द्वारा बड़ी संख्या में दुर्लभ और संकटग्रस्त वन्यजीवों की मांग के कारण वैश्विक स्तर पर अवैध वन्यजीव व्यापार और जंगलों से जानवरों की तस्करी को बढ़ावा मिला हो सकता है।
दूसरी ओर, वनतारा ने ‘द वायर’ को दिए एक बयान में इन सभी आरोपों को “पूरी तरह से निराधार”, “भ्रामक” और “छवि खराब करने की साजिश” करार दिया है।
रिपोर्ट में लगाए गए मुख्य आरोप
- व्यापक स्तर पर अधिग्रहण: ट्रेड डेटाबेस के विश्लेषण के आधार पर रिपोर्ट में दावा किया गया कि दिसंबर 2024 के अंत तक वनतारा में 39,000 से अधिक जंगली जानवर लाए जा चुके थे, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा हाल के महीनों में आया।
- दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी: रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र में 181 शेर, 200 से अधिक तेंदुए और हाथी मौजूद हैं। इसके अलावा वेनेजुएला से 142 विशाल चींटीखोर (Giant Anteaters), 101 विशाल ऊदबिलाव (Giant Otters) और कांगो से 100 दुर्लभ हैमलिन बंदर (Hamlyn’s Monkeys) लाए गए हैं।
- दुनिया का इकलौता बंधक माउंटेन गोरिल्ला: रिपोर्ट के मुताबिक, वनतारा में 14 ओरंगुटान और एक माउंटेन गोरिल्ला भी है, जो कथित तौर पर वर्तमान में दुनिया का एकमात्र कैप्टिव माउंटेन गोरिल्ला है।
- तस्करी के केंद्रों से सप्लायर्स: डेटा दिखाता है कि 32 देशों के 53 सप्लायर्स के जरिए जानवर भेजे गए। सबसे ज्यादा 11,729 जानवर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के सप्लायर्स के जरिए आए, जिसे वन्यजीवों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी का एक प्रमुख ट्रांजिट हब माना जाता है।
- जंगलों से सीधे शिकार की आशंका: रिपोर्ट में यूरोपीय वन्यजीव व्यापारियों के हवाले से कहा गया कि वनतारा की भारी मांग के कारण बाजार में सप्लाई कम हो गई है, जिससे जंगलों से सीधे जंगली जानवरों को पकड़कर उन्हें कागजों में ‘कैप्टिव-ब्रेड’ (बंधक प्रजनन) दिखाकर बेचने की संभावना बढ़ गई है।
वनतारा का रुख और सफाई
वनतारा ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अपने जवाब में संस्थान ने स्पष्ट किया:
- कोई जंगली शिकार नहीं: वनतारा ने कहा कि वे किसी भी तरह से जंगली जानवरों के शिकार या अवैध व्यापार को बढ़ावा नहीं देते।
- कानूनी और नैतिक स्रोत: केंद्र में लाए गए सभी जानवर अन्य पंजीकृत चिड़ियाघरों, रेस्क्यू सेंटरों, निजी संग्रहकर्ताओं द्वारा सरेंडर किए गए जानवरों या विपरीत परिस्थितियों से बचाए गए जीवों की श्रेणी में आते हैं।
- साइट्स (CITES) और भारतीय नियमों का पालन: संस्थान ने जोर दिया कि सभी जानवरों का स्थानांतरण CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) और भारतीय कानूनों के तहत पूर्ण दस्तावेजों और परमिट्स के साथ हुआ है। CITES परमिटों पर सवाल उठाना संबंधित देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की संप्रभुता पर सवाल उठाने जैसा है।
- आंकड़ों को बताया गलत: वनतारा ने रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों (जैसे 100 हैमलिन बंदरों की मौजूदगी) को झूठा और मनगढ़ंत बताया। उनका कहना है कि वे आधिकारिक तौर पर केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) को अपनी वार्षिक रिपोर्ट सौंपते हैं, जिसके आंकड़े सार्वजनिक हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की मांग
इस जर्मन रिपोर्ट से पहले दक्षिण अफ्रीका के 30 से अधिक वन्यजीव संरक्षण संगठनों के गठबंधन (WAPFSA) ने भी अपने पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखकर भारत के वनतारा केंद्र को बड़े पैमाने पर निर्यात किए जा रहे वन्यजीवों की जांच की मांग की थी। संरक्षणविदों का तर्क है कि निजी केंद्रों द्वारा अचानक बढ़ाई गई भारी मांग अनजाने में ही सही, लेकिन वैश्विक तस्करों के लिए व्यापार का एक नया जरिया बन जाती है।






